Wednesday, April 1, 2020

Delhi Markaz and Corona: Stupidity, Crime and Ignorance for sure but not "Jihad" | you may skip this due to your prejudice

Let me start this article by saying that I have no intention to encourage  "Islamophobia" or justify the actions of Markaz authorities or govt authorities. But you may choose not to read further.  

Prevention of corona demands physical distancing, but religion runs on to bring people together that too in masses.

Due to this opposite nature, religious activities have played a very significant role in the spread of the virus. Many of them do think that their Gods(read God associated with your religion) will save you from the virus at any cost, but they forget that God doesn't save someone for their own mistakes. Before I start about Delhi Markaz's story, let me point out that one such Jamat gathering organized in Feb is held responsible for spreading the virus in six countries, including Malaysia. 
Let me start with a Press note issued by Markaz to defend themselves.

 The above press note didn't talk about the violation of the 12th March govt order of self-quarantine of the international traveler. It also violated the 13th March Delhi govt order, which prohibited the events having more than 200 people. In short, the press note tried hard to hide all the things they did wrong.
In fact, the press note did mention in the second paragraph that the ongoing program discontinued on the day when Prime Minister of India Narendra Modi announced Janta Curfew. That indicates that Markaz did violate all the orders of Delhi govt for seven days i.e., 13th March-19March.
Union Ministry of Home Affairs (MHA) shared details of foreign and Indian Tabhlig Jamaat (TJ) workers in India with all States on March 21, 2020, after COVID-19 positive cases among these workers surfaced in Telangana. MHA also said that about 1746 persons were staying in Hazrat Nizamuddin Markaz aon March 21. Of these, 216 were foreigners, and 1530 were Indians. 
There have been various reports that police and other officials did talk with Markaz authorities to evacuate the building and quarantine. But in the absence of cooperation, even NSA Ajit Doval had to visit Markaz to convince them for the same on 28-29 Midnight.
Even Delhi police have released a video of one of such requests (which was not first) to Markaz authorities.

In our country, police, and authorities afraid to take swift actions if it is related to any religious issues else it wouldn't have taken 10days to kept on requesting for the evacuation of the Markaz building 
Things didn't stop here, Maulana Saad have also seen saying a statement like "don't hear what doctor says" and blah blah. Unfortunately, people who have attended and already gone to various places across the country, are not self-reporting to authorities so that their lives, their family, and their community/area/town lives can be saved. It had also come to notice that police have been attacked by people when police went to Madhubani for tracing the people related to Markaz.  
Yes, I am against the generalization of ignorance/crime/stupidity committed by a few people to the whole community. Therefore, I criticize and demand action against those who are promoting it as #CoronaJihad.  But I'm also against people(with the blue tick) who are defending Markaz authorities and opposing the FIR against Markaz for violation, ignorance, and negligence. There had been various desperate attempts to save Markaz by circulating numerous fake/misleading images/stories saying gathering at Markaz discontinued on 15th March, but that's not true. The press note by Markaz itself stated that they stopped the program on 19th March.
So far, 400+ positive cases and at least 10 deaths have been found across India related to this Markaz. Officers, IB, and police of various states are working on war footing to trace/isolate/test/hospitalize all the people who are directly/indirectly related to this Markaz. 
I have one appeal to all if you can not stop defending them, at least request people related to this Markaz to self-report so that many lives could be saved. 
I also recommend readers watch excellent video show put by Shekhar Gupta on his show #CutTheClutter.


2 comments:

  1. एक मार्क्सवादी की कहानी-

    ‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था.
    ख़ूब पढ़ा-लिखा युवक. स्वस्थ, सुंदर. नौकरी भी अच्छी. विद्रोही. मार्क्स-लेनिन के उद्धरण देता,
    चे-ग्वेवारा का ख़ास भक्त.

    कॉफ़ी हाउस में काफ़ी देर तक बैठता. ख़ूब बातें करता. हमेशा क्रांतिकारिता के तनाव में रहता.
    सब उलट-पुलट देना है. सब बदल देना है. बाल बड़े, दाढ़ी करीने से बढ़ाई हुई. विद्रोह की घोषणा करता. कुछ करने का मौक़ा ढूंढ़ता.

    कहता,‘मेरे पिता की पीढ़ी को जल्दी मरना चाहिए. मेरे पिता घोर दकियानूस, जातिवादी, प्रतिक्रियावादी हैं. ठेठ बुर्जुआ. जब वे मरेंगे तब मैं न मुंडन कराऊंगा, न उनका श्राद्ध करूंगा. मैं सब परंपराओं का नाश कर दूंगा.
    चे-ग्वेवारा ज़िंदाबाद.’

    कोई साथी कहता,‘पर तुम्हारे पिता तुम्हें बहुत प्यार करते हैं.’
    क्रांतिकारी कहता,‘प्यार? हां, हर बुर्जुआ क्रांतिकारिता को मारने के लिए प्यार करता है. यह प्यार षडयंत्र है. तुम लोग नहीं समझते'.

    'इस समय मेरा बाप किसी ब्राह्मण की तलाश में है, जिससे रुपए लेकर उसकी लड़की से मेरी शादी कर देगा. पर मैं नहीं होने दूंगा. मैं जाति में शादी करूंगा ही नहीं. मैं दूसरी जाति की लड़की से शादी करूंगा. मेरा बाप सिर धुनता बैठा रहेगा.’

    साथी ने कहा,‘अगर तुम्हारा प्यार किसी लड़की से हो जाए और संयोग से वह ब्राह्मण हो तो तुम शादी करोगे न?’
    उसने कहा,‘हरगिज नहीं. मैं उसे छोड़ दूंगा.

    "कोई क्रांतिकारी अपनी जाति की लड़की से न प्यार करता है, न शादी".

    एक दिन उसने कायस्थ लड़की से कोर्ट में शादी कर ली. उसे लेकर अपने शहर आया और दोस्त के घर पर ठहर गया.
    बड़े शहीदाना मूड में था.
    कह रहा था,‘आई ब्रोक देअर नेक.

    मेरा बाप इस समय सिर धुन रहा होगा, मां रो रही होगी. मुहल्ले-पड़ोस के लोगों को इकट्ठा करके मेरा बाप कह रहा होगा ‘हमारे लिए लड़का मर चुका’ वह मुझे त्याग देगा.
    मुझे प्रापर्टी से वंचित कर देगा.

    आई डोंट केअर. मैं कोई भी बलिदान करने को तैयार हूं.
    वह घर मेरे लिए दुश्मन का घर हो गया.
    बट आई विल फ़ाइट टू दी एंड-टू दी एंड.’

    वह बरामदे में तना हुआ घूमता. फिर बैठ जाता.
    कहता,‘बस संघर्ष आ ही रहा है.’

    उसका एक दोस्त आया. बोला,‘तुम्हारे फ़ादर कह रहे थे कि तुम पत्नी को लेकर सीधे घर क्यों नहीं आए. वे तो काफ़ी शांत थे. कह रहे थे, लड़के और बहू को घर ले आओ.’

    वह उत्तेजित हो गया,‘हूं, बुर्जुआ हिपोक्रेसी.
    यह एक षडयंत्र है. वे मुझे घर बुलाकर फिर अपमान करके, हल्ला करके निकालेंगे. उन्होंने मुझे त्याग दिया है तो मैं क्यों समझौता करूं? मैं दो कमरे किराए पर लेकर रहूंगा.’

    दोस्त ने कहा,‘पर तुम्हें त्यागा कहां है?’
    उसने कहा,‘मैं सब जानता हूं-आई विल फ़ाइट.’
    दोस्त ने कहा,‘जब लड़ाई है ही नहीं तो फ़ाइट क्या करोगे?’

    क्रांतिकारी कल्पनाओं में था. हथियार पैने कर रहा था. बारूद सुखा रहा था.
    ‘क्रांति का निर्णायक क्षण आने वाला है. मैं वीरता से लड़ूंगा. बलिदान हो जाऊंगा.’

    तीसरे दिन उसका एक ख़ास दोस्त आया. उसने कहा,‘तुम्हारे माता-पिता टैक्सी लेकर तुम्हें लेने आ रहे हैं. इतवार को तुम्हारी शादी के उपलक्ष्य में भोज है. यह निमंत्रण-पत्र बांटा जा रहा है.’

    क्रांतिकारी ने सर ठोंक लिया. पसीना बहने लगा. पीला हो गया.
    बोला,‘हाय, सब ख़त्म हो गया. ज़िंदगीभर की संघर्ष-साधना ख़त्म हो गई.
    नो स्ट्रगल. नो रेवोल्यूशन. मैं हार गया.

    वे मुझे लेने आ रहे हैं. मैं लड़ना चाहता था.
    मेरी क्रांतिकारिता! मेरी क्रांतिकारिता!
    देवी, तू मेरे बाप से मेरा तिरस्कार करवा.
    चे-ग्वेवारा ! डियर चे!’

    उसकी सपत्नी चतुर थी. वह दो-तीन दिनों से क्रांतिकारिता देख रही थी और हंस रही थी. उसने कहा,‘डियर एक बात कहूं. तुम क्रांतिकारी नहीं हो.’
    उसने पूछा,‘नहीं हूं. फिर क्या हूं?’
    पत्नी ने कहा,‘तुम एक बुर्जुआ बौड़म हो.

    #हरिशंकरपरसाई

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  2. मित्र यही तो विडंबना है कि अगर आप निष्पक्ष भी रहो तो आप पर पक्षपात का आरोप लगेगा भले ही बदले में सामाजिक जीवन की सुरक्षा दाँव पर क्यों न लग रही हो .......दीन और दानव का फर्क साबित करते हुए लोग ।
    पर असल समस्या उन लोगों से है जो सब देखकर भी पॉलिटिकली करेक्ट होने के ढोंग (फ़ेकिंग गुड) की वजह से या तो आंख बंद कर लेते हैं या फिर मौन स्वीकृति।

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